दीपावली का त्यौहार क्यों इतना खास हे ? || Diwali Information In Hindi

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Diwali Information In Hindi

 

  • 2019 Diwali Date :- 27 October
  • 2020 Diwali Date :- 14 November

 

दिवाली हिन्दु का सबसे बडा त्योहार है इस दीन  भगवान श्री राम , मा सिता  एवम  लक्ष्मण के साथ  14 वषॅ का  के वनवास  समाप्ति के  बाद  अयोध्या वापस आये थे । दशेहरा  के दीन रावण का वध किया ओर  अयोध्या वासीओ अपने घरो  की आगंन मे रंगोलीया  से एवम पूरी अयोध्या को दीपक से सजा दीया यह प्रंथा आज भी अेसी ही कायम है दीवाली पांच दीनो तक चलने वाला त्योहार है । इसका हर दीन का एक अलग-अलग महत्व  है भारत मे 5- 11-2018 से लेकर 9-11-2018 तक दीवाली का उत्सव चलेगा आज जानते है उस पांच दीनो के बारे मे  जानते हे उसका महत्व

 

धनतेरस

दीवाली का पहेला दीन है धनतेरस पूराणो के अनुसार देवताने एव असुरोने  मिल कर समुद मंथन किया  समुद मंथन से 14 रत्न निकले  उनमे से एक है भगवान धनवती हिन्दु कैलेडर के अनुसार कुष्ण पक्ष के तेरस दीन समुद मंथन से भगवान धनवती अपने हाथ मे अमृत का घडा लेकर प्रगट हुअे भगवान धनवान आयुवेद के जनक है । एवम संपूणॅ संसार को आयुवेद का ज्ञान उन्होने ही दीया हे तब से लेकर आज इस दीन को धन तेरस या धनत्रयोदशी एवम धनवान त्रयोदशी के नाम से भी  मनाया जाता है धन तेरस के दिन सोनु लेना शुभ माना जाता हे

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नरक चतुदॅशी (काल चतुदॅशी)

दीवाली का दुसरा  दीन नरक चतुदॅशी एक समय संसार मे नोमिदेवि के पुत्र नरका सुर  का आंतक था उसे वरदान था की  उसकी मुत्यु  उसके  मां के हाथ हो सकती  हे ।अगले जनमे भूमि देवीने  सत्यभामा  के रूपमे जन्म लिया सत्यभामा का विवाह भगवान कृष्ण  के साथ हुआ एवम उहोने  नरका सूर का अंत किया तब से लेकर आज तक उसे दिन को नरक चतुदॅशी के रूपमे मनाया जाता है ।

 

लक्ष्मी पूजा (दीपावली)

दीवाली का तीसरे दीन को  लक्ष्मी पूजा करते हे देवता एवम आसुर दारा किये गये समुद मंथन से उस दीन मां लक्ष्मी प्रगट हुई थी ।  तभी से प्रत्येक वषॅ यशॅ ओर वैभव की कामनाएे करने  के लिअे की जाती है दीवाली के दीन  मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश अराधना की जाती है कथा के अनुसार मां लक्ष्मीजी की कोई संतान नही थी जब के मां पावॅती के दो पुत्र थे । लक्ष्मीजी ने तब माता पावॅती से भगवान गणेश गोद लेने की इच्छा प्रगट की पावॅती को  यह चिता थी  के लक्ष्मीजी कभी भी एक स्थान पर नही रूकती गणेशजी की देख-भाल कोन करेगा

स चिता पर मां लक्ष्मीजीने  कहा के वो जहा भी जायेगी अपने  साथ गणेश को  भी लेकर जायेगी ओर तब से जहा भी लक्षमीजी का  अंराधना  होती हे वहा भगवान गणेश की पूजा करना  आवश्यक है । यह तो दीवाली पर श्री राम अंयोध्या वापस आये थे  पर दीवाली के भगवान लक्ष्मी एवम  गणेश की पूजा होती हे माना जाता हे के  इस समय भगवान विष्णु विसराम  करते हे ।  इस लिये भगवान राम की पूजा नही की जाती है ।

 

गोवॅधन पूजा

दीवाली का यह दीन है गोवॅधन  पूजा रामायण के अनुसार जब भगवान राम लंका पर आक्रमण करने के लिये पूल का निमाणॅ कर रहे थे तब सभी वानरोने अपनी -अपनी शकित के अनुसार पथ्थर  लेकर आ रहे थे हनुमानजी पूल बनाने  के लिये  गोवॅधन पवॅत लेकर आये थे पर उनके  आने से पहेले पूल का काम  पुरा हो गया था   पूल के निमाॅण मे अपना उपयोग ना हुआ

गोवॅधन ने अपना दु:ख श्री राम  को प्रगंट किया भगवान ने गोवॅधन को वचंन दिया के  अगले जन्म मे उनका  उपयोग जरूर  करुगा एवम हनुमान को आज्ञा दी के  गोवॅधन को व्रज मे रखा कर आये  । अगले जनम मे भगवान ने  कृष्ण का अवतार लिया तो उहोने व्रजवासी से गोवॅधन की पूजा करने को  कहा इसे नाराज होकर ईन्द ने भारी वषाॅ की  तब भगवान कॄष्णने लोगो को  बचाने के लिये गोवॅधन को बचाने के लिए गोवधन  को अपनी  एक उंगली पर उठा लिया  एवम ईन्द का घंमड तोड तब से  लेकर आज तक इस  दीन को गोवॅधन की पूजा की जाती है

 

भाई- दूज

पूराणो के अनुसार मुत्यु के देवता यमराज  अपनी बहेन यमुना से मिलने अपने घर गई  अपनी बहेन के  आदर – संस्कार से वो बहुत  प्रंसन्न हुअे यमराजने उन्हे वरदान दीया के इस दीन जो भी  भाई अपने बहेन घर जायेगा उसे  व्यकित कालचक्र से मुक्ति मिलेगा ।एेवम मोक्ष की प्राप्ति होगी तब से लेकर आज तक यह भाई-दूज के रूप मे मनाया जाता है एवम इस दीन बहेन अपने भाई की  सुरक्षाकामना के लिये पूजा करती है

 

 

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