Makar Sankranti Information In Hindi || मकर संक्रांति क्या हे और क्यों मनाया जाता हे

 

 

Makar Sankranti 2020

जेसे आप जानते हे हिन्दु का प्रुमुख त्योहार मे से एक हे मकर संक्रांति पूरे भारत तथा नेपाल मे किसी ने किसी रूप मे 14 या 15 जनवरी को मनाया जाता है क्यु के आज के दीन सूयॅ ककॅरेखा को छोडकर मकररेखा तरफ आते हे यह कहे तो सूयॅ दक्षिण से उत्तरायण होते है उस दिन को कही कही उत्तरायण भी कहेते हे इस पवॅ को अलग अलग राज्य मे अलग नाम से मनाते है

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Makar Sankranti 2019

 

Makar Sankranti Information In Hindi

 

मकर संक्रांति क्यु मनाया जाता है 

शास्त्रो के अनुसार म दक्षिणय श्री नारायण को देवता की रात्री अथात नकारात्मक प्रतिक तथा उत्तरायण को देवता का दिन अथात सकारात्मक का प्रतिक माना जाता है इस लिये इस दिन को जंप ,तप ,दान , स्नाव ,श्रादॅ ,तपॅण आदि का विशेष महत्व हे । तप ,जंप ,दान ,स्नान हर चीज अगर आप गुरू बनाये हुएे है यह चीज आपके लिये फल दायी होगा ।

भारत देश त्रि गोलाधॅ मे स्थिति है उतर गोलाधॅ उपर स्थिति है मकर संक्रांति से पहेले सूयॅ द,क्षिण गोलाधॅ मे होता हे अथात भारत से अप्रेक्षा अधिक दुर रहेना हेै इसी कारण यहा पर बंडी रात्रे ओर छोटे दिन होती हे यहा पर शरदी का मोसम होता हे जेसा आप जानते हे अभी के समय मे जेसे जनवरी ़यहा पर भारत मे ठडी लग रही हे लेकिन ऑस्ट्रेलिया जायेगे तो दक्षिण आफ्रिका वहा पर अभी गरमी हे 40 डिग्री सेल्सियस वहा पर है कितु मकर संक्राांति सूयॅ उतर गोलाधॅ की ओर आना शुरू हो जाता है इस लिये इस दिन से रात्रे छोटी एवम दिन बडे होने लगते है तथा गरमी का मोसम शुरू हो जाता हे

22 दिसम्बर से 25 दिसम्बर दिन बडे होने लगते हे इंडिया मे मकर संक्राति के दिन से दिन बडे होने लगते हे गरमीआने लगती है क्यु की हर जगह वातावरण अलग होता हे जेसे आप जानते हे क्रिसमस डे मनाया जाता था पक्षिमी देशो मे इंडिया मे इसी को मकर संक्रांति कह सकते हे इसी पवॅ को मनाया जाता हे मकर संक्रांति के रूप मे मना़य जाता है दिन बडा होने से प्रकाश अधिक होगा रात्री छोटी होगी होने से अंधकार कम होगा अथात मकर संक्रांति पर सूय की राशि प्रवेश परिवतॅन को अंधकार से प्रकाश की ओर होना माना जाता है प्रकाश अधिक होने से चेतना एवम कायॅ मे शकित मे वृद्धि होती हे ।

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हम जानते है जब दिन बडे होगे तो लोग अधिक से अधिक काम कर पायेगे यहा पर एक पॉजिटिव फेलती है अेसा जान कर संपूणॅ भारत मे लोग दारा विभिन्न रूपो मे सूयॅ देव उपासना , अराधना तथा पूजा उनके कृतज्ञता प्रगट की जाती हे ओर इस दिन को प्रतिवषॅ 14 जनवरी को कही कही 13 जनवरी मनाये जाता है मकर संक्रांति मनाने का एक ऐतिहासिक कारण यह भी है एेसी मान्यता यह भी है भगवान सूयॅ अपने पुत्र शनिदेव से मिलने उसके घर जाते है शनिदेव मकर राशि के स्वामी हे मकर राशि अथवा मकर यानी के शनि अतह इस दिन को मंकर संक्रांति के रुप मे मनाये जाता हे ।

महाभारत के समय मे भीष्म पितामह ने अपना शरीर त्याग करने के लिये मंकर संक्रांति का दिन पंसद किया था मंकर संक्रांति के दिन भगीरथने कठिन तपस्या से गंगाजी पृथ्वी पर लाकर भगीरथ के पीछे पीछे चल कर कपिल मुनि के आश्रम से होती हुएे सागर मे जाकर मिलती है इसलिये इस दिन एेतिहासिक रूप मे भी देखा जा सकता हे मंकर संक्रांति किसान के लिये बहुत महत्व पूणॅ त्योहार है आप हम जान ते हे

 

नेपाल मे मकर संक्रांति केसे मनाये ?

नेपाल के सभी राज्यो मे अलग अलग नाम से भाती भाती के रीति रिवाजो दारा भकित एवम उत्साह दारा से यह पवॅ मनाया जाता है मकर संक्रांति के दिन किसान अच्छी फसल के लिये भगवान को धन्यवाद देकर उनकी अनुकुपा सदेव लोगो पर बनाये रखना का आशीर्वाद मागते हे इस लिये मंकर संक्रांति का त्योहार को फसल एवम किसानो के त्योहार के नाम से भी जान जाता है नेपाल मे मकर संक्रांति को महागिरी इस सूयॅ उतरायॅण थारु समुदाय मे महागी कहा जान हे इस दिन नेपाल सरकार सावॅजनिक छूटी देती हे थारू समुदाय का यह प्रमुख त्योहार नेपाल मे बाकी समुदाय भी तीथॅ स्थण मे स्नान करते हे ओर धमँ दान भी करते है

 

भारत मे मकर संक्रांति केसे मनाते हे ?

मंकर संक्रांति सबसे पहेले हरियाणा ओर पंजाब मे इसे लोहरी के नाम से भी जाना जाता हे यह 13 जनवरी को मनाया जाता हे

आज इस दिन दान करने से वो हमको सो गुना बढ कर पुण्य प्राप्त होता हे शुद्ध घी ओर कबल का दान करना चाहिएे पूरे भारत मे ओर विदेश मे अलग अलग रूप मे मनाया जाता हे पोष मास मे जब सूयॅ मंकर राशि पर आता है तब मनाया जाता हे हम अलग अलग राज्यो की बात करे तो मंकर संक्राति के विविध रूपो मे मनाते हे ।

 

विभिन नाम से राज्यो मे उत्सव 

उत्तरप्रदेश,राजस्थान,उतराखण्ड,बिहार,सिकिकम,गोआ,ओडीसा,छतीसगढ,झारखण्ड,तेलगाना,पंजाब,तमिलनाडु,हरियणा,हिमाचल प्रदेश,कनाटॅक,केरल,मध्यप्रदेश,महाराष्ट्र,मणिपुर,असम,पक्षिम बंगाल,जम्मू कश्मीर मे मनाया जाता हे

 

मकर संक्रांति के अलग अलग नाम

➡ इसे आई पोगल के नाम से तमिलनाडु में मनाया जाता है
➡हरियाणा ओर हिमाचल प्रदेश की बात करे तो माघी के नाम से जाना जाता है
➡ अगर हम असम की बारे मे बात करे तो वहा पै भोगाली बिहु के नाम से जाना जाता हे
➡कश्मीर घाटी मे इसे शिशु संक्रात के नाम से भी जाना जाता हे
➡उतर प्रदेश ओर पक्षिमी बिहार मे खिचडी के नाम से जाना जाता हे
➡ पश्चिम बंगाण मे इसे पोष संक्रान्ति ओर कणाॅटक मे मंकर संक्रमण के नाम से जाना जाता हे

 

विदेश मे अलग नाम ओर महत्व

➡बांग्लादेश मे पौष संक्रान्ति के नाम से मनाते है
➡नेपाल मे इसे माघी संक्रान्ति या माघ संक्रन्ति खिचडी संक्रान्ति कहेते हे
➡थाईलेन्ड मे ईसे सागकरन कहेते हे
➡लाओस मे पि मा लायो के नाम से जाना जाता है
➡ म्यानमागॅ की बात करे तो थियान नाम से जाना जाता है
➡ कम्बोडिया मे मोहा संगक्रान नाम से जाना जाता है
➡श्रीलंका मे पोगल ओर उझवर तिरूनल नाम से जाना जाता है

भारत ओर बहार के विदेश मे त्योहार महत्व जेसे बांग्लादेश ,नेपाल,थाईलेन्ड,लाओर,म्यानमार,कम्बोडिया ओर श्रीलंका मे विशेष रूपो से विशेष नाम से मनाया जाता है ।

हरियाणा ओर पंजाब मे इसे लाहरी के रूप मे एक दिन पहेले 13जनवरी को ही मनाया जाता है इस दिन वहा पे अंधेरा होता ही आग जला कर अग्निदेव की पूजा करते हुई तिल चावल ओर गुड एवम भूने हुवे मक्के की आहुति दी जाती हे इस साम्रगी को तिलचोली भी कहा जाता है इस अवसर पर मूगंफली तिल की बनी गजक ओर रेवडीया आपस मे बाट कर खुशियो से मनाते हे बहू धर धर जाकर लोकगीत गाकर लोहरी मागती हे । नई बहू ओर नवजात बच्चे के लिये लोहरी का विशेष महत्व होता हे वहा पै इसके साथ परंपरागत मक्के की रोटी सरसो के शाक का भी आंनद उठाया जाता हेै ।

उतर प्रदेश की बात करे तो यह मुख्य रूप से दान का पवॅ मनाया जाता है उत्तर प्रदेश के इलाहबाद मे गंगा यमुना ओर सरस्वती संगम पर प्रति वषॅ एक मास तक यहा माघ मेला लगता हे 14 जनवरी से हर साल माघ मेला की शुरूआत होती है 14 दिसम्बर से 14 जनवरी के बीच के समय मे खेर मास के नाम से जाना जाता है एक समय एेसा था पूरे उतर भारत 14 डिसम्बर से 14 जनवरी तक पूरे एक महिनेव किसी भी अच्छे काम को अंजाम नही  दिया जाता था मतलब शादी विवाह नही किया जाता था अब समय के साथ लोग बदल गई हे परतु एेसा विश्वास हे 14 जनवरी मंकर संक्राति से पृथ्वी पर अच्छे दिनो की शुरूआत होता हे एेसी मान्यता हे के माघ मेला की पहेला स्थान मंकर संक्राति से शुरू होकर शिवरात्री की स्नान तक चलता हे ।

समाप्त

 

 

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