Naraka Chaturdashi 2019 || नरक चतुर्दशी क्या हे और क्यों मनाया जाता हे

 

Naraka Chaturdashi

भारतीय हर त्योहार मे  परमात्मा के अलग अलग स्वरूपो को पूजा या इबादत करते हे हिन्दु का मुख्य त्योहार यह  दर्शाता है बुराई पर अच्छाई की जीत अंधेरे पर रोशनी की चमक  ओर जीवन मे निराशा  से आशा की तरफ हमारे कदम यानी के ।  जीवन मे खुशियाँ भरे पलो का आगमन

naraka chaturdashi 2019
Naraka Chaturdashi 2019

 

Naraka Chaturdashi 2019 Puja Time

-›› नरक चतुर्दशी पारंभ तिथि     :- 15:46 On 26 ओक्टोबर 2019
-›› नरक चतुर्दशी समाप्त तिथि  :- 12:23 On 27 ओक्टोबर 2019

 

Kali Chaudas

आपको पता हे दिवाली  एक दिन नही पाचं दिन तक मनाये जाती है जी हा मतलब के हर एक दिन नया त्योहार ओर हर त्योहार का अपना अलग महत्व होता हे  अलग – अलग रीति रिवाज से मनाया जाता हे  जेसे धनतेरस , नरक चतुदॅशी ,दिवाली , गोवरधन पूजा, भाई -बीज पहेले दिन धनतेरस और दुसरे दिन आता हे नरक चतुदॅशी या फिर काली चतुदॅशी रूप   चदॅश नरक चतुदॅशी हर नाम की  अपनी  एक महत्व हे  इस दिन भगवान कॄष्ण ने नरका सुर  का अंत करके तीनो  लोग मे शांती की स्थापना  कियी थी

नरका सुर जेसे राक्षस वध  अपने आप मे बहुत बडा त्योहार मनाते है कुछ लोग इस दिवाली काली चौदश रूप मे भी मनाते हे  काली यानी के  श्री महाकाली  चौदॅश यानी  के श्री महाकाली की पूजा चोदश के दिन  पूजा मनाये जाती हे इंन्डिया की काफि स्टेट  मे सुबह उठकर पानी मे सुगंधी तेल डालकर उसी से स्नान  करते हे   ओर पूजा आराधना करते हे  वेसे इस लोगो कुलदेवी की आराधना करते हे  आंखो मे काजल डाल के किसे की नजर न लगे  , रूप चतुदॅशी या नरक चतुदॅशी के बारे मे जानते हे कई बाते |

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रूप चतुदॅशी,काली चौदस,नरक चौदस,रूप चौदस अथवा Naraka Chaturdashi के नाम से भी जाना जाता हे  इस दिन  कार्तिक कॄष्ण  चतुदॅशी पर मुत्यु के देवता यमराज का पूजा का  विधान हे  इस  वषॅ 2019  मे रूप  चतुदॅशी 26 अक्टूबर  शनिवार के दिन मनाये जायेगा  इस  दीन संध्या के बाद दीपक जलाये जाते है चार तरफ रोशनी की जाती हे रुप चतुदॅशी के दीन तेल का भोजन  तेल की मालिश देत घावन घुटन ओर स्नान आवश्यक हे

दोस्तो नरक चतुदॅशी का पूजन अकाल मुत्यु से मुकित  और  स्वास्थ्य सुरक्षा के लिये किया जाता हे  एक पैराणिक मान्यता के अनुसार  भगवान श्री कॄष्ण ने कार्तिक को कृष्ण पक्ष चतुदॅशी के दीन नरकासुर देवता ओर ऋषि को आतक से मुकित दिलवाई थी  इसी लिये  भगवान श्री कॄष्ण  की पूजा का भी विधान हे  भगवान श्री कॄष्ण पूजन करके व्यकित को सौन्दॅय की प्राप्ति होती हे रूप चतुदॅशी  संबधी एक कथा बहुत प्रचलित हे

 

प्रचलित कथा

एक हिरण गभ नामक राज्य मे एक योगी  रहा करता था एक बार योगी राजने प्रभु को  पाने की इच्छा से समाधि धारण करने का प्रयास किया अपने तपस्या को  धारण करने से कई कष्टो का  सामना करना पडा अपनी विफल दशाॅ के कारण वो दुखी हो गये कभी विचरण करते हुऐ नारद जी योगी राज के पास पहोचे ओर दुखो का कारण पूछा योगी राजने कहा के हे मुनिवर स्वयम मे प्रभु को पाने के लिये  भकित मे लिन हुवा इस कारण मुझे अनेक कष्ट हुवा एसा क्यु हुवा  योगी राज के करुणा भरे वचन सुनकर नारदजी ने कहा हे योगी राज मागॅ तो इचित अपनाया पर तो देह पालन नही किया जिसके कारण तुमारी दशा हे नारद उनको कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुदॅशी दीन व्रत  रख कर भगवान विष्णु पूजा करने को कहेते है क्यु के अेसा करने योगी की शरीर पूनह पहेले जेसा स्वास्थ्य ओर रूपवान हो जायेगा  नारद के कथन के अनुसार योगीने व्रत किया ओर व्रत के भाव स्वरूप शरीर पहेले जेसा  स्वच्छत ओर सुंदर  हो गया  इसी लिये चतुदॅशी को भुख चतुदॅशी के नाम से जाना जाने लगा |

 

रूप चतुदॅशी या नरक चतुदॅशी महत्व

दोस्तो इसी दीन प्रांतकाल शरीर पर उतर लगाकर स्नान करना चाहिऐ अपामागॅ अर्थार्त छीछडी की पतीओ को जल मे डालकर स्नान करने  से  स्वास्थ्य की प्राप्ति  होती हेै  पूजन हेतु एक थाल सजा कर  प्रमुख दिया जलाये 16 छोटे दीया जलाये इसके बाद  रोली की  खिर गुडा अबिल गुलाल फूल से इष्टदेव की  पूजा करे इसके बाद सभी दियो को घर के आगंन पर अलग अलग रखे दो गणेश ओर लक्ष्मी के आगे धूप ओर दीप जलाये संध्या समय दीप दान करते है ओर  दक्षिण दिशा की तरफ  चोदा दीया जलाये जाते हे  जो के  यम देवता की दिशा है विधि विधान से पूजा करने पर व्यकित के सभी पाप से मुकित हो जाती हे…….

 

 

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